Saturday, March 17, 2018

हियरिंग लाॅस के कारण





बहुत सी बीमारियां ऐसी होती है जो पैदाइयषी होती है या अनुवांषिक होती है जिनका इलाज लाइलाज होता है लेकिन कुछ बिमारियां ऐसी होती है जो हमारी लापरवाही की वजह हो सकती है साथ ही आस पास के वातावरण के कारण लेकिन इसका भुगतान हमारें षरीर को भरना पड़ता है। ऐसी ही एक बिमारी हियरिंग लाॅस जिसे हम बहरापन कहते है। इसमें हमें सामने वाले के षब्द साफ साफ सुनाई नहीं पड़ते है। साथ ही उन्हें आपके सामने तेज बोलना पड़ता है। और जहां तेज आवाज में गाने या षाॅरगुल होता है तो उस बीच तो ऐसे व्यक्तियों को जिन्हे कम सुनाई पड़ता है काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है कई जगह तो उन्हे बेहद षर्मींदगी महसूस होती है। क्योंकि ऐसे में लोग आपका मजाक भी बनाते नहीं चूकते। लेकिन यदि आप लापरवाही न बरतें हुए इसके कारणों को ध्यान में रखते हुए इस पर ध्यान दे तो आप इस समस्या से छुटकारा भी पा सकते है।

हियरिंग लाॅस
बहरापन पूर्ण या आंशिक रूप से ध्वनियों को सुनने की शक्ति का ह्रास होने की स्थिति को कहते हैं।यह एक आम बीमारी है। इस रोग में न सिर्फ सुनने की शक्ति कम हो जाती है बल्कि व्यक्ति की सामाजिक व मानसिक परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। जब कोई व्यक्ति बोलता है, तो वह ध्वनि तरंगों के द्वारा हवा में एक कंपन पैदा करता है। यह कंपन कान के पर्दे एवं सुनने से संबंधित तीन हड्डियों-मेलियस, इन्कस एवं स्टेपीज के द्वारा आंतरिक कान में पहुंचता है और सुनने की नस द्वारा आंतरिक कान से मस्तिष्क में संप्रेषित होता है। इस कारण ध्वनि का अहसास होता है। यदि किसी कारण से ध्वनि की इन तरंगों में अवरोध पैदा हो जाता है  तो बहरापन हो जाता है।
हियरिंग लॉस दो प्रकार का होता है, पहला कंडक्टिव हियरिंग लॉस और दूसरा सेंसोरीन्यूरल हियरिंग लॉस।
कंडक्टिव हियरिंग लॉस
यह कान के बाहरी और बीच के हिस्से में आई किसी समस्या की वजह से होता है। इसे बीमारी की वजह से होने वाला बहरापन भी कह सकते हैं।
वजह
- कानों से पस बहना या इन्फेक्शन
- कानों की हड्डी में कोई गड़बड़ी
- कान के पर्दे का डैमेज हो जाना
- ट्यूमर, जो कैंसर नहीं होते

सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस
यह कान के अंदरूनी हिस्से में आई किसी गड़बड़ी की वजह से होता है। ऐसा तब होता है, जब हियर सेल्स नष्ट होने लगते हैं या ठीक से काम नहीं करते। दरअसल, कान में तकरीबन 15 हजार स्पेशल हियरिंग सेल्स होते हैं। इनके बाद नर्व्स होती हैं। हियर सेल्स को नर्व्स की शुरुआत कहा जा सकता है। इन्हीं की वजह से हम सुन पाते हैं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ-साथ ये सेल्स नष्ट होने लगते हैं, जिससे नर्व्स भी कमजोर पड़ जाती हैं और सुनने की शक्ति कम होती जाती है।

हियरिंग लाॅस के कारण
-बढ़ती उम्र में तो ज्यादातर लोगों को कम सुनने की क्षमता होने लगती है।
क्योंकि आपकी नसें कमजोर पड़ जाती है।
-बहुत देर तक यदि आपको कानों में ईयर फोन लगा कर गाने की आदत है तेा ये आदत आपको दिक्कत में डाल सकती है इससे आपके कानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
वजह
-कई प्रकार की दवाएं जो बहरेपन का कारण बन सकती है। कुछ खास तरह की दवाएं मसलन जेंटामाइसिन का इंजेक्शन। बैक्टीरियल इन्फेक्शन आदि में इस्तेमाल
-हाॅर्मोंस असंतुलन भी इसकी वजह बन सकता है। साथ ही खसरा,कंठमाला,मेनिंजाइटिस आदि में सुनने की क्षमता पर असर हो सकता है।
-यदि आपको तेज आवाज में टीवी देखने या गाने सुनने की आदत है तब भी आप इस बिमारी का षिकार बन सकते है।
-प्रेग्नेंसी के समय कई बार महिलाएं सावधानी नहीं बरततीं, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को यह समस्या हो जाती है।
-हाई ब्लड प्रेशर, दिमागी बुखार या फिर ज्यादा शोर-शराबे वाला माहौल भी इसका एक मुख्य कारण है।
-कान में तेल, ईयरबड, पिन, पेन आदि जैसी चीजें डालने पर।

इनके अलावा और भी कई कारण-
- सर्दी लग जाना।
-कान में चोंट लगना
- कान में कीडा घुस जाना या संक्रमण होना।
- कान में अधिक मैल
-नहाते समय कान में पानी प्रविष्ठ होना।
- अधिक मोबाइल का उपयोग
-गलत दवाईयों का सेवन
-कान में हड्डियोंका विकास आदि।

हियरिंग लाॅस के लक्षण
आरम्भ में हमें बहरेपन का ज्यादा महसूस नहीं होता है। लेकिन धीरे धीरे इसके लक्षण हमारे सामने आने लगते है जिन्हे आप तुरंत समझ जाए तो अच्छा है साथ ही इसे नजरअंदाज किए बिना डाॅक्टर के पास जाकर इसका भली प्रकार से इलाज कराएं-
-ऐसा महसूस होता है कि कान में सिटी सी बज रही है
-काफी कम सुनने लगता है या उंचा सुनाई देता है।
-तेज आवाज में आप टीवी और गाने सुनते है क्योंकि आपको कम आवाज में कुछ समझ नहीं आता है।
-दूसरों  से बात करने में आप असमर्थ सा महसूस करते है।,
- बातचीत में बार-बार लोगों से पूछना कि उन्होंने क्या कहा
- फोन पर सुनने में दिक्कत होना
- नवजात बच्चे का आवाज न सुन पाना
-कान का भारि होना

सावधानी बरतें
यदि आपको भी कम सुनने की परेषानी से बचना है तो जरूरी है कि कुछ सावधानियां बरतें जिससे आप इस समस्या से बच सके।
-यदि आप किसी ऐसी जगह कार्य करते जहां तेज आवाज रहती है तो कानों में रूई या ईयर प्लग लगाकर रह सकते है।
-ध्यान रहें कभी भी कान में सरसो का या कोई अन्य तेल न डाले।
-कान कोई भी चीज जैसे तिल्ली या पिन न डालकर साफ करे।
-स्नान करते समय ध्यान रखना चाहिए कि साबुन या पानी कान में न जा पाए क्योंकि इससे भी बहरापन हो सकता है।
-टी.वी या गानों को तेज आवाज में नहीं सुनना चाहिए क्योंकि इससे कानों की नसों पर असर पड़ता है। कानों की नसें खराब होने पर यह रोग ठीक होना मुश्किल हो जाता है।
-कानों में किसी भी तरह के रोग होने पर इलाज में देरी ना करें, क्योंकि वक्त पर इलाज होने से यह रोग बिल्कुल खत्म हो सकता है।
कानों को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से बचना चाहिए।

इलाज
-कान में इंफेक्षन के कारण सुनने में दिक्कत आने से उसे दवाओं के जरिए ठीक किया जा सकता है।
-यदि कान के पर्दा किसी कारणवष क्षतिग्रस्त हो गया है तो उसे भी सर्जरी के जरिए ठीक किया जा सकता है।
-लेकिन यदि नर्वस में किसी वजह से सुनने की क्षमता में दिक्कत आई है तो उसे ठीक करना बेहद मुष्किल है। इसके लिए हियररिंग एड का इस्तेमाल किया जाता है।

डा0 षलभ षर्मा इएनटी स्पेषलिस्ट

Friday, March 16, 2018

गर्मियों में हल्का खाएं स्वस्थ रहे



गर्मियां आते ही सूरज की तेज रोषनी और गर्म हवाओं से आपको सामना करना पड़ता है साथ ही कब कौन सी बिमारी आप घेर ले ये डर आपको सताता रहता है। गर्मियों के दिनों में आप थोड़ा सा कार्य करते ही अपने षरीर में थकान और बेचैनी महसूस करतते है। लेकिन स्वस्थ रहने के लिए सबसे आवष्यक है कि आप अपने खान पान का पूरा ख्याल रखें। क्योंकि यदि पानी की कमी या आपने कुछ उल्टा सीधा खा लिया तो आपको डीहाईडरेषन की समस्या भी पैदा हो सकती है। इस मौसम में आप अपने उपर पर्याप्त रूप से ध्यान दें नही ंतो आपको कई तरह की मुष्किलों का सामना करना पड़ सकता है और साथ ही आपकी दिन प्रतिदिन हालत ख्राब हो सकती है। यहां हम आपको बता रहे है कि आप किस तरह अपने खान पान पर ध्यान देकर गर्मियों में भी स्वस्थ रह सकती है।

अपनी दिनचर्या में खान पान को कुछ इस तरह ष्षामिल करे

-प्रात काल उठते ही चाय काॅफी की बजाए दो गिलास गुनगुना पानी पीएं इससे आपका पेट साफ रहेगा साथ ही आप पेट की समस्याओं से दूर रहेगे। वैसे भी गुनगुना पानी फैट को भी कम करता है।

-याद रखे कि पानी पीने के बाद कम से कम एक या घंटे के अंतराल में 9 से 10 के बीच अपना नाष्ता करे। नाष्ते में आप ठंडाई,दही से बनी चीजे जेसे छाछ,फलों का जूस,सत्तू आदि पी सकते है साथ ही ओटस,वेजिटेबल दलिया,साबुत दाने की खिचड़ी,उपमा,ढोकला,अंकुरित दालें आदि आप अपने नाषते में षामिल कर सकते है।

-अब बारी आती है आपके दिन के खाने यानि लंच का ध्यान रखें कि आप गर्मियों में हमेषा हल्का खाने पर ध्यान देें ऐसी सब्जियों को षाामिल करे जो पचाने में आसान होती है जैसे लौकी, टिंडा, कद्दू, तुरई आदि खाएं। साथ ही सलाद में टमाटर, खीरा, ककड़ी, प्याज आदि लें। यदि आप छाछ साथ में पीते है तो वह आपके खाने को पचाने में पर्याप्त रूप से सहायक सिद्व होगी।

-षाम का नाष्ता जिसे हम ब्रंच कहते है आप 4 से 5 में करे। अक्सर ज्यादातर लोग षाम को चाय पीना पसंद करते है लेकिन गर्मियों में चाय से दूर ही रहे तो अच्छा है क्योंकि ये आपके ष्षरीर में एसिड को बनाती है जिससें आपको काफी परेषानी हो सकती है। इस समय आप नारियल पानी, ठंडाई, खसखस का शरबत या फ्रूट जूस ले सकते  हैं। इससे शरीर में ताजगी बनी रहेगी। इनके साथ स्प्राउट्स में खीरा, ककड़ी व अनार मिलाकर खाएं। चाहें तो एक मौसमी फल भी खा सकते हैं। ऑफिस गोइंग हैं तो भुने चने और फू्रट सलाद लें।

-डिनर 8-9 बजे के बीच में करें। रात का खाना हमेषा हल्का होना चाहिए क्योंिक रात को खाना पचाना ज्यादा मुष्किल हो जाता है। यदि आप दो रोटी खाते है तो एक रोटी खाएं साथ में सब्जी जैसे घीया,तौरी आदि बाउल भरकर खाएं इससे आपकी भूख भी मिट सकेगी और आप हल्का महसूस करेंगे। खिचड़ी भी आप अपने रात्रि के भोजन में षामिल कर सकते है।

गर्मियों में इन खादय पदार्थो पर ध्यान रखें ध्यान-

तरबूज खाइये
गर्मियों में तरबूज ना केवल आपको तरो ताजा बनाए रखेगा बल्कि यह आपका पेट भी भरे रखेगा। इसमें विटामिन सी होता है जो कि हमारे शरीर से विशैले पदार्थों को निकालने में मदद करता है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है।

डिटॉक्स वॉटर पिएं वजन घटाएं
कई लोग ज्यादा पानी नहीं पीते, लेकिन आप चाहें तो अपने पानी का स्वाद सिर्फ कुछ पदार्थ डाल कर बढ़ा सकते हैं। आपको करना सिर्फ इतना है कि पानी में कुछ स्लाइस नींबू, पुदीने और खीरे की डाल कर एक कांच की बोतल में भरना है। फिर जब भी प्यास लगे, तब इसमें से पानी पियें। आप देंखेगे की धीरे धीरे कर के आपको मोटापा कम हो जाएगा।

पेय पदार्थ जो आपको रखेंगे स्वस्थ
पानी रोजाना 10-15 गिलास पानी आपको स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। कोशिश करें कि ज्यादा ठंडा पानी न पीएं।नींबू पानी चाहे तो चीनी डालें या नमक या फिर दोनों। यंे हर तरह से फायदेमंद होता है। नारियल पानी मां के दूध के बाद सबसे बेहतरीन पेय यह प्रोटीन और पोटैशियम का अच्छा सोर्स है। एसिडिटी,अल्सर में कारगर भी सिद्ध होता है।छाछ में काला नमक और पिसा-भुना हुआ जीरा डली डालने से प्रोटीन खूब मिलेगा। और आपको ठंडक भी पहुंचाएगी। आम पना गर्मियों का खास ड्रिंक है ये विटामिन-सी का अच्छा सोर्स है।

वेजिटेबल जूस
घीया,खीरा,आंवला,टमाटर आदि का जूस मिलाकर पी सकते हैं।फू्रट जूस में  मौसमी,संतरा,माल्टा आदि मौसमी फलों के जूस लें। साथ ही बेल शरबत शरीर को ठंडक के साथ एसिडिटी,कब्ज से भी छुटकारा दिलाता है।

जंक फूड
बर्गर,पिज्जा,तंदूरी चिकन जैसे जंक फूड्स को गर्मियों में बॉय कहना ही अच्छा है। आइसक्रीम का सेवन भी सीमित मात्रा में ही करें।

डाईटीषियन साई महिमा से बातचीत पर आधारित

Monday, March 12, 2018

प्रोटीन की कमी होने पर





बेहतर स्वास्थ्य हममें से प्रत्येक की इच्छा होती है। लेकिन इसको कायम रखने के लिए हर कोई अपनी जीवनषैली पर उतना ध्यान नहीं दे पाता जितना देना चाहिए। यदि खादय पदार्थो की बात की जाए तो हम अपने खान पान में इतने सतर्क नहीं दिखते है जिससे हमें बहुत सी कठिनाईयों या यूं कहे बिमारियों का सामना करना पड़ जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कई बार हमारे षरीर में ऐसे परिवर्तन होते है जिन्हे हम अनदेखा कर देते है और वहीं आगे चलकर बेहद घातक सिद्ध होते है। प्रोटीन की बात की जाए तो यह वैसे हम ज्यादातर अपने खादय पदार्थो से प्राप्त करते है लेकिन कई बार कुछ ऐसे बदलाव होते है जो हमें स्वयं को पता नहीं चलते है लेकिन वे प्रोटीन की कमी के संकेत होते है आईए जाने-

प्रोटीन
हमारे षरीर को हमेषा प्रोटीन की आवष्यकता रहती है। ये हमारे षरीर में ईटो के समान है। ये षरीर की कोषिकाओं और उतको केा बचाता है और उनकी मरम्मत करता है। जैसे त्वचा,मांसपेषियां,बाल,हडिडयां आदि। प्रोटीन असल में अमीनो अम्ल की कड़ियॉं होते हैं। ये कार्बन, ऑक्सीजन, और नाईट्रोजन से बने होते हैं। हमारा शरीर प्रोटीन के कई अमीनो अम्ल नहीं बना सकता, इसलिए यह जरूरी है कि ये हमारे आहार का हिस्सा हों। हममे से कुछ लोग ऐसे होते है जो प्रोटीन तब लेते है जब उनको जरूरत होती है जैसे कि व्यायाम या जिम करते हुए लेकिन यदि आप अपने खादय पदार्थो में अपनी जरूरत के मुताबिक प्रोटीन लेते है तो आपके षरीर प्रोटीन की कमी ही नहीं होगी।

प्रोटीन की कमी के संकेत

खाने की लालसा
जब आपकी बाॅडी में प्रोटीन की कमी होती  है तो आपको बार बार भूख लगती है। हम ऐसे में ज्यादातर ऐसे खादय पदार्थो का सेवन करते है जो हमारी सेहत की दृष्टि से फायदेमंद न होकर नुकसानदायक है। ऐसे में जरूरी है कि आप प्रोटीनयुक्त खादय पदार्थो का सेवन करे। जैसे यदि आप मांसाहारी है तो चिकन सैंडवीच और यदि षाकाहारी है तो दाल का सूप बना कर पी सकते है ये आपको फायदे के साथ आपकी प्रोटीन की आवष्यकता की पूर्ति भी करेगे।

बालों का पतला होना
यदि आपको लगे की आपके बाल या पतले होते जा रहे हैं या नहाते वक्त या कंघी करते समय झड़ रहे है तो हो सकता है की आपको प्रोटीन की कमी हो रही हो। बाल मुख्यतः एक विशेष प्रकार के प्रोटीन केराटिन से बने होते है। जब शरीर में प्रोटीन कम पहुंचता है तो शरीर दुसरे जरुरी काम जैसे प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए पहले काम में लिया जाता है। इसलिए प्रोटीन की कमी का पहला संकेत बालों के गिरने से मिलता
है। प्रोटीन युक्त आहार आपके बालों की खूबसूरती बढ़ाने का काम करता है। बाल प्रोटीन से ही बनते हैं और खाने में उचित प्रोटीन लेकर आप आपने बालों को चमकदार, मजबूत और खूबसूरत बनाए रख सकते हैं। शरीर में प्रोटीन की मात्रा सही रखना बहुत आवश्यक है इसलिए प्रोटीन तत्व जैसे सोयाबीन और सोया से बने उत्पाद, दाल, दूध-दही और नट्स आदि का सेवन बालों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।

नाखूनों और त्वचा का कमजोर होना
सौंदर्य के लिहाज से भी प्रोटीन बेहद जरूरी माना जाता है. अगर सही मात्रा में प्रोटीन नहीं लिया गया तो इसका नकारात्मक असर त्वचा और नाखूनों पर देखा जा सकता है. प्रोटीन की कमी से त्वचा बेजान और सूखी नजर आने लगती है साथ ही नाखून नाजुक होने लगते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप प्रोटीनयुक्त भोजन खाएं।

अक्सर थकान महसूस होना
आहार में पर्याप्त प्रोटीन्स के बिना एंटीबाॅडीज का निमार्ण नहीं हो पाता और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। प्रोटीन्स की कमी के कारण पर्याप्त मात्रा में एंजाइम्स भी नहीं बन पाते जो पाचन को प्रभावित करता है और शरीर द्वारा पोशक तत्वों के उपयोग करने की क्षमता को बाधित करता है। हमें कोई भी कार्य करते हुए थकावट महसूस होने लगती है। और हम अपने आपकों ही दोष देने लगते है।

प्रोटीन की कमी से होने वाली मसूडों की बीमारियां
मसूड़ों की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। लेकिन 35 वर्ष की उम्र के बाद मसूड़ों की बीमारी का खतरा बढ जाता है। और अगर शरीर में प्रोटीन की कमी हो तो इस उम्र में हर चार में से तीन लोग मसूड़ों की बीमारी से पीड़ित होते हैं। पेरियोडोंटाइटिस दांतों की समस्या ज्यादातर प्रोटीन की कमी के कारण भी होती है प्रतिदिन 1000 मिलीग्राम प्रोटीन और विटामिन खाने से मसूडों की समस्या कम होती है।

जोड़ों और मांसपेशियों का दर्द
अक्सर लोगों में जोड़ो और मांसपेषियो में दर्द बना रहता है। इसका ज्यादातर कारण प्रोटीन की कमी होना है। प्रोटीन में सिनोविअल फलूइड होता है जो जोड़ों में मौजूद रहकर उन्हे लचीला बनाता है। प्रोटीन की कमी होने से फलूइड कम बनता है जिससे हमें जोड़ो और मांसपेषियों में दर्द होना षुरू हो जाता है।

नींद नहीं आना

नींद के लिए बॉडी को सेरोटोनिन अमीनो एसिड की जरूरत होती है। ये प्रोटीन की वजह से बनते हैं। इसलिए प्रोटीन की कमी से नींद न आने की शिकायत होती है। और अक्सर रात में भी नींद टूट जाती है। यह इसलिए होता है क्यों कि हमारा शरीर शुगर और कार्बोहाइड्रेट मांगता है जिससे दिमाग आराम नहीं कर पता है।

 वजन बढ़ना
अगर आपका वजन बढ़ रहा है तो आपके आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा है और प्रोटीन की काम। प्रोटीन चयापचय बढ़ता है जिससे शारीरिक काम ज्यादा करते हैं और आपका वजन कम होने लगता है। इसलिए आपके आहार में प्रोटीन की मात्रा को बढ़ा दें जिससे आप मानसिक रूप से फिट रहें और स्लिम भी।

प्रोटीन की कमी कैसे दूर करें
 भोजन में अधिक प्रोटीन वाली चीजें शामिल करें। दूध , पनीर , दही , अंडे , दाल , राजमा , सोयाबीन , मसूर , फलियाँ , बादाम , पिस्ता,काजू आदि मेवे , मूंगफली , मक्का , गेहूँ ,आदि साबुत अनाज , सब्जी आदि पर्याप्त मात्रा में अपने भोजन में शामिल करें। एक पुरुष कोलगभग 56 ग्राम और महिला को 46 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है।

Saturday, March 10, 2018

बिना किसी अपराधी भाव के मीठा खा सकेंगी


हर व्यक्ति अपनी किसी न किसी आदत से  परेशान होता है या यूं कहे उसे किसी न किसी चीज की लत होती है यहां हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में भोजन मे ली जाने वाली खादय सामग्री बात कर रहे है। मीठा किसे पसंद नही लेकिन जब वह आदत बन जाए तो  शोचनीय स्थिति बन जाती है। या यूं कहे कि बीमारियों को सीधा निमंत्रण देना है। दादी मां के लडडू जो स्वाद और आकार दोनों ही तरह से हमारे मुंह में पानी ला देते है हम कैसे इनसे अपने आपको रोक पाएं ये बेहद  मुश्किल कार्य है। हमे सब कुछ पता होते हुए भी हम चाॅकलेट,वाइट ब्रेड,जैम,जैली,एनर्जी  ड्रिंक आदि ऐसी चीजों से हम अपने आपको रोक नहीं पाते है। रेडी टू इट होने की वजह से बिना किसी मेहनत और समय देखे हम इन्हे तुरंत खा लेते है इनमे भरपूर मात्रा में षुगर होती है लेकिन सेहत की दृष्टि से देखा जाए तो इनमे  न्यूट्रीशन नाम मात्र भी नहीं होता। इन्हे खाने के बाद आप सोचती है चाय या काॅफी में षर्करा की मात्रा कम कर देने से वजन नहीं बढ़ेगा जबकि षायद आपको पता नहीं कि इस तरह के खादय पदार्थ पूरे हफते की आपके  शरीर की आवष्यकता को पूरा कर देते है तब आप किसी खादय पदार्थ मे षर्करा ले या न ले।  जरूरी है कि आप अपने खान पान का नियम बनाए और उनको अपनी रोजमर्रा की जिंदगी पर लागू करे। जिससे आप बिना किसी अपराधी भाव के इनका सेवन कर सकेगी। क्योंकि अति हर चीज की बुरी होती है। 
फलो आौर सब्जियों का सेवन
अक्सर देखा जाता है कि लोगो को मीठे की जगह फल खाना असंभव लगता है क्योंकि उन्हे खाने के बाद मीठे की काफी ललक उठती है लेकिन यदि सेहत की दृष्टि से देखा जाए तो रोज मीठा खाना जहर के बराबर है। कोषिष करे खाने के बाद फलो और सलाद का सेवन करे क्योंकि फल मीठे होने के कारण आपको मीठे की तृप्ति को पूरा करेंगे साथ ही इनमे भरपूर मात्रा में विटामिन्स होने के कारण आपकी सेहत को फायदा पहुंचाएंगे। इसलिए जरूरी है कि फल खाने की आदत डाले।
स्वयं को इनाम दे
आप तय कर ले कि आपको हफते मेें षर्करा की मात्रा कितनी लेनी है जो आपकी सेहत के लिए लाभप्रद हो। यदि आप सही मात्रा को ध्यान में रखते हुए मीठा खाते है तो आपका वजन भी नहीं बढ़ेगा साथ ही आपको किसी बिमारी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही आप आईस क्रीम भी बेझिझक खा पाएंगे। और यदि आप ऐसा करने में सक्षम रहे तो आप अपने आपको इनाम देकर प्रोत्साहित कर सकते है। इससे आपका आत्मविष्वास भी बढ़ जाएगा। 
सुपरमार्केट में बेकार की चीजें लाने से बचे
सबसे जरूरी है कि हमें खरीददारी करते समय बेकार की चीजंे लेने से बचना चाहिए क्योंकि सुपरमार्केटस में आपकी मनपसंद ढेरों चीजो होती है साथ ही इनको देखकर आपका मन ललचा जाता है लेकिन जरूरी है कि इनसे बचा जाए आप अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए इन्हे अनदेखा करे साथ ही सामान खरीदने जाते समय एक सूची बना ले कि आपको क्या जरूरी चीजे खरीदनी है उसको ध्यान में रखते हुए ही सामान खरीदे इससे आपकी बजत और समय दोनो बचेगा।
 कमजोरी का समाधान
अक्सर ऐसा होता है कि खाली समय में जब आपके पास कुछ कार्य करने को नहीं होता तब आपका मन कुछ हल्का फुल्का खाने को करता है तब ज्यादातर आप ऐसी खादय सामग्री का सेवन करते है जो आपकी हेल्थ के लिए सही नहीं। ऐसे में जरूरी है कि आप स्वयं को किसी कार्य में व्यस्त रखें। अपनी मनपसंद गतिविधियां करे इससे आपका मन भी खुष रहेगा साथ व्यस्त रहने के कारण आपका बेकार की चीजों का खाने का मन नहीं करेगा।

हमेषा भोजन चबा कर खाएं
खाना हमेषा चबा कर खाना चाहिए क्योंकि इससे आपका खाना सही प्रकार से पचता है साथ ही आपको खाना खाने में समय लगने से आपके दिमाग को एक संतुष्टि मिलती है कि आपने भरपेट खाना खाया है। धीरे धीरे चबाकर भोजन करने से खाना स्वादिष्ट लगता है साथ ही संतुष्टि का एहसास होता है जिससे बार बार भूख लगने की समस्या से छुटकारा मिलता है।

समय को सुनिष्चित करें
अक्सर लोग समय पर खाना नहीे खाते है और जब भूख लगती है तो अपनी डाइट से ज्यादा खा लेते है या यूं कहे आॅवरइटिंग कर लेते है साथ ही मीठा खाना भी नहीं भूलते है।लेकिन जरूरी है कि आप खाने का समय सुनिष्चित करे उसी को ध्यान में रखते हुए खाना खाए। सही समय पर खाना खाने से आपकी सेहत भी सही रहेगी और आपको अफसोस भी नहीं होगा कि आपने जरूरत से ज्यादा खा लिया है।

कुछ अलग प्रयोग करे
यदि आप चाहे तो खाने में बदलाव ला सकते है कुछ ऐसे प्रयोग जो आपके मीठा खाने की इच्छा को ध्यान में रखते हुए हो। जैसे यदि आप ब्रेड पर जैम लगाकर खाते है तो उसकी जगह षहद का इस्तेमाल कर सकते है ये सेहतमंद भी है और आपकी मिठास को भी बनाया रखेगा। इसी तरह यदि आप काॅर्नफलैक्स खाते है और उसमे चीनी डालते है तो उसके स्थान पर षहद डाल सकते है। खाने के बाद मीठे की इच्छा हो तो कुछ और मीठा खाने के बजाए गुड़ खाए ये भोजन को पचाता है।

जीआई फूड को चुनें
चीनी खाने की आदत को कंट्रोल करने के लिए जीआई फूड को खाएं। इससे शरीर को ऊर्जा मिलेगी और आपका हर टाइम मीठा खाने का मन भी पूरा हो जाएगा। जीआई फूड में नट्स, ब्राउन राइस, नॉन स्टार्ची सब्जियां, फलियां और ओट्स शामिल होती है।

 

खुश रहे

अगर आप खुश रहेंगे तो भावनात्मक रूप से कमजोर नहीं पड़ेगे और इस तरह शारीरिक रूप से तंदुरूस्त रहेगें। आप चाहें तो नींबू पानी भी समय - समय पर पीकर सुगर खाने की आदत से छुटकारा पा सकते है। कुछ मजाकिया काम करके भी आप खुश रह सकते है।

मीठा खाने की तलब
शुगर
खाने की लत छुड़वाने के लिए आप ध्यान दें कि आपको चीनी खाने या कुछ भी मीठा खाने की लत कब लगती है। आप उसी टाइम कुछ और खा लें जैसे - इलायची, ड्राई फूट्रस आदि। इससे आपका मुंह चलता रहेगा व कुछ और खाने का मन नहीं करेगा।

Wednesday, February 7, 2018

ऐज को देखकर खाएं



जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है वैसे वैसे हमे अपने खान पान पर पूरा ध्यान देना पड़ता है। खुराक भी हमारी एक सी नहीं रहती। हमारे पोषण की आावश्यकता हर स्तर और उम्र पर बदलती रहती है। उम्र के हर पायदान पर खुद को स्वस्थ रखने के लिए हमें प्रोटीन,विटमिन, और मिनरल के अलग अलग मात्रा की आवश्यकता पड़ती है। यदि हम अपनी उम्र को ध्यान में रखकर भोजन करेंगे तभी स्वस्थ रह पाएंगे।

किशोरवस्था में
इस उम्र मे शरीर का मेटाबाॅलिक रेट काफी अधिक रहता है। हम जो भी खाते है वो उर्जा मे तब्दील हो जाता है। शरीर के विकास के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है। इसके लिए दुग्ध उत्पाद और मांसाहारी भेाजन का सेवन जरूरी है। जो शाकाहारी भोजन करते है उन्हे पनीर या सोया अधिक मात्रा मे खाना चाहिए। कैफीन हडिडयों से कैल्शियम को निथार लेता है।विटामिन बी और डी की आवश्यकता विकास के लिए जरूरी है। विटामिन ए के लिए नारंगी और पीले फल के साथ सब्जियां,विटामिन सी के लिए खटटे फल और विटामिन ई के लिए बादाम,पिस्ता जरूरी है। अनीमिया और आयरन की कमी से बचने के लिए सूखी खुबानी,मनक्का,सलाद के अलावा दाल मे पालक डालकर खाना चाहिए।

बीसवे के बाद
टिश्यू के विकास के लिए प्रोटीन और
कार्बोहाइड्रेट आवश्यक है। इस दौर मे प्राकृतिक रेशे वाले स्टार्च युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। इनसे मस्तिष्क और मांसपेशियों को उर्जा भी मिलती है। पोटेशियम युक्त केला,आलू,मशरूम खाएं। इस उम्र मे विटामिन सी बेहद जरूरी है। क्योंकि यह तनाव को दूर भगाता है। दिल के रोग से बचाव और बच्चे का जन्म ठीक से हो जाए,इसके लिए पालक और हरी सब्जियां खूब खानी चाहिए। मजबूत हडिडयों के लिए रेाजाना दो गिलास दूध जरूर पीएं। कैल्शियम के लिए ब्रोकली खा सकती है,जो मैग्नीशियम,विटामिन के और फास्फोरस का भी अच्छा स्त्रोत है। जब आप बीसवें पायदान से तीसवें में पहुच जाएं तो ध्यान रखें कि शरीर की जरूरत भी बदल जाती है। इस उम्र मे चयापचय स्तर कम हो जाता है,वनज बढ़ने लगता है और टाइप दो डायबीटीज क ेखतरे बढ़ जाते है। वसा और शक्कर की मात्रा कम कर दें। नमक वाले स्नैक्स की जगह सेब,गाजर जैसे रंगीन फल सब्जियां खाएं। हरी पतेदार सब्जियां जैसे पालक लें ।सलाद ड्ेसिंग के लिए आॅलिव आॅयल ले,ताकि काॅलेस्ट्ाल का सही स्तर बना रहें। हडिडयों की मजबूती के लिए कैल्शियम,विटामिन वाले भोजन करने चाहिए।

चालीस के बाद
इस उम्र में गिरी का सेवन अति आवश्यक है। खासकर बादाम का
क्योंकि ये कोलेस्ट्रॉल  के स्तर को कम करते है दिल की बीमारी के खतरे को कम करते है। दरअसल इस उम्र मे हमारा प्रतिरक्षा प्रणाली धीमी होने लगती है। इस उम्र मे अधिकतर महिलाएं कार्बोहाइड्रेट कम लेना शुरू कर देती है जो ठीक नहीं है। अपनी डाइट से स्टार्च फूड बिल्कुल न कम करें। ये भेाजन रेशेदार भी होते है और पेट को भरे होने का अहसास भी देते है। मौसमी फल लेना भी फायदेमंद है। खूब सारे बीन्स खाएं।

Thursday, January 18, 2018

दौड़कर घटाएं अपना वजन


आजकल वेट लाॅस करने की तो जैसे होड़ लगी हुई है महिलाओं और युवतियों अपनी ड्ेस में फिट होने के लिए हर वह प्रयत्न करने के लिए तैयार है जिससे वेट कम हो सके। लेकिन ध्यान रखें कि डाइट के साथ वर्कआउट करना बेहद अवष्यक होता है। आज बहुत से ऐसे वर्कआउट है जिनके जरिए हम वेट लाॅस कर सकते है। इनमें से दौड़ना बेहद फायदेमंद और असरदार एक्सरसाइज है इसके जरिए बहुत ही जल्द अपना वेट लाॅस कर सकते है आईए जानिए-
दौड़ने का सही तरीका
वैसे तो दौड़ना हम सभी को आता है लेकिन जरूरी है उसकी सही जानकारी होना कि किस तरह से दौड़ा जाए कि हमारा वेट लाॅस हो। आज कल लोग रोज सबुह पार्क और जिम में अपना वजन घटाने के लिये खूब दौड़ते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि किस प्रकार से दौड़ना हमारे लिये सेहतमंद होता है? बहुत से लोग बहुत ज्यादा दौड़ने के बावजूद भी अपना वजन कम नहीं कर पाते। अगर आप भी पहली बार दौड़ रही हैं, तो आपके लिये कुछ बातों को जानना बहुत जरुरी है। आइये जानते हैं इसके बारे में।
सिर की पोजिषन
आपके सिर के पोजिशन पर आपका पूरा पॉश्चर निर्भर करता है और इसी पर यह निर्भर करता है कि आप कितनी क्षमता से दौड़ रहे हैं। दौड़ते वक्त सिर सीधा रखते हुए सामने देखना चाहिए। नीचे अपने पैर की तरफ या कहीं और देखने से पूरे शरीर का पॉश्चर गड़बड़ हो जाता है और इसका सीधा असर आपके दौड़ने पर पड़ता है। गर्दन और पीठ तनी हुई और एक सीध में होनी चाहिए।
थोड़ा वार्मअप हो जाए
कोई भी वर्कआउट करते समय ध्यान रखें थोड़ा वार्मअप कर लें जिससे कि दौड़ते वक्त आपके पैरों में मोंच ना आए या फिर मासपेशियों में चोट ना लगे। कैसे करें शरुआत सबसे पहले हल्की हल्की जॉगिंग करें या फिर धीरे धीरे चलना शुरु करें! इससे आप लंबे समय तक दौड़ सकेगें। पहले दो से तीन मिनट तक दौडे उसके बाद धीरे धीरे अपना समय और बढाएं।
दौड़ते वक्त ध्यान रखे
अगर आप ट्रेडमिल पर दौड़ती हैं तो उसकी सबसे अच्छी बात यह होती है कि उसमें आप अपनी इच्छा अनुसार स्पीड को बढाया या घटाया जा सकता है। नए लोगों को अपनी स्पीड धीमी रखनी चाहिये और फिर धीरे धीरे अपनी स्पीड बढानी चाहिये।
पैरो और उंगलियों पर ध्यान दें
दौड़ते वक्त अपने फॉर्म या पोस्चर पर ध्यान दें हर कोई अलग अलग मुद्रा में दौड़ता है। कोई अपनी एडियों का प्रयोग करता है तो कोई पैरों की उंगलियों पर। अगर आप एडियों पर जोर दे कर दौड़ेगें तो आपके घुटनों पर इसका बुरा असर पडेगा और अगर आप पैरों की उंगलियों पर जोर दे कर दौड़ते हैं तो, इससे आपकी काल्फ मासपेशियों पर जोर पड़ता है जिससे पैरों में दर्द हो जाता है। दौड़ते वक्त अपने पैरों की उंगलियों को सीधा रखें और उसे ना ही अंदर की ओर मोड़ कर दौडे और ना ही ज्यादा बाहार की ओर निकाल कर।
घुटनोें का ख्याल रख्ेां
अपने घुटनों का ख्याल रखें अगर आपके घुटने मजबूत रहेगें तो आप ठीक से दौड़ पाएंगें। मजबूत घुटनों के लिये आपको वॉल स्क्वैट वाली एक्सरसाइज करनी चाहिये।
सही जगह
अगर आप बाहर दौड़ने जा रही हैं, तो सही जमीन और सतह का होना बहुत जरुरी है। एक खराब और ऊबड़ खाबड़ सतह आपके घुटनों और पैरों के लिये नुकसानदेह साबित हो सकता है।

Monday, January 15, 2018

खुबसूरत कारपेटस से घर को सजाएं




घर के इंटीरियर में कारपेटस काफी अट्रैक्टिव लुक देते है। और वैसे भी सर्दियों में तो ये सर्दी लगने से बचाते है और इनकी डिमांड काफी बढ़ जाती है। आप काॅरपेटस से यदि इंटीरियर में कुछ बदलाव चाहती है साथ ही वही बोरिंग सा सालों से बिछा कारपेट को बदलना चाहती है तो आज मार्केट में ढेरों वैरायिटियां है कारपेट की। जो आपके घर को एक स्टाइलिश और डिसेंट लुक देगा। यहां हम आपको कुछ कारपेटस की जानकारी दे रहे है जिनसे आप अपने घर को एक अलग लुक दे सकेंगी-

वूलन कारपेट
सर्दियों में वूलन कारपेट को काफी पसंद किया जाता हैै। क्योंकि इनसे गर्माहाट बनी रहती है। साथ ही काफी अट्ेक्टिव लगते है। ये कालीन प्योर वूल के होते है। यदि आप ट्डिशनल कालीन लेना चाहती है तो ये फूलों वाले और बेहद भारी होते है। लेकिन यदि आप लाइट वेट में वूलन कालीन चाहती है तो वे भी मार्केट में उपलब्ध है। इनकी खासियत है कि एक बार मन भरने के बाद आप इसे डाई करके दोबारा इस्तेमाल में ला सकती है।


सिंथेटिक कारपेट
यदि आप कुछ अलग कारपेटस चाहती है तो सिंथेटिक कारपेट ले आएं। ये आपके स्टेटस पर काफी असर डालेंगे। और इनकी काफी वैरायिटी मार्केट में उपलब्ध है। साथ ही ये आसानी से घर में धूल जाते है। लुक वाइज तो ये काफी सुंदर होते है साथ ही इनके पैटर्नस इतने अधिक अट्रैक्टिव है जो देखते ही बनते है।

सिल्क कारपेट
कारपेटस में सिल्क कारपेट काफी लाइट होते है। इनमे जिआॅमेट्किल डिजाइन काफी इन है। ये कलरफुल होने के साथ काफी डिजाइन्स में आपको मिल जाएंगे। आप अपने रूमस के अकोर्डिंग इन्हे अरेन्ज करे। साथ ही ये बेड की साइड में या सोफे के सेंटर में यूज होते है।

लेदर कारपेट
लेदर कारपेट काफी ट्ेन्ड में है। ये कलरफुल होने के साथ आपकी रेंज के अकोर्डिंग आपको मिल जाएंगे। ये मशीन से बनाए जाते है। साथ ही इनमे ंसिंथेटिक मटीरियल का प्रयोग किया जाता है। ये दिखने में बेहद अट्रैक्टिव लगते है।

कार्टून प्रिंट कारपेट
बच्चों के रूम को अधिक अट्रैक्टिव बनाने के लिए आजकल कार्टूनस का काफी यूज किया जाता है। कारपेटस में भी कार्टूनस का काफी यूज किया जा रहा है। फर्नीचर और कर्टेन से मैच करके इन कारपेटस का यूज किया जाता है।

अन्य कारपेट
कारपेटस में और भी वैरायिटियां हैं कारपेट में कोरिन्थिया बाथ रग,मिलेफेलयर मैट,मून गेज,फलग बाॅर्डर,माउस रग और सेवीलेड प्लेड कारपेटस भी मार्केट में उपलब्ध है। कोरिन्थिया बाथ रग का डिजाइन डायमंड पैटर्न पर आधारित होता है। ये धोने में तो आसान होते है,डिजाइन भी खूब आकर्षित करते है। मिलफलोर मैट का डिजाइन पूरी तरह बाॅटेनिकल थीम पर आधारित होता है। यह कालीन पूरी तरह काॅटन से बना होता है। यह तमाम कलर्स और शेप में मिल जाता है। यह इतना पतला होता है कि इसे दीवार,टेबल व दीवार पर पेेंटिग के तौर पर भी यूज किया जा सकता है। मून गेज कालीनों में ज्यादातर दो कलर यूज किए जाते है रेड और प्लम। इसके अलावा हाथ से बने हुए सिल्क वूल के काॅर्पेट,वूलन दारीज,काॅटन फलोर कवरिंगस भी काफी पसंद किए जाते है।

कारपेट की शोपिंग करते समय
-कारपेट का रंग आपके फर्नीचर या दीवारों के रंग से मेल खाता हो।
-कमरे के आकार व उपयोग के हिसाब से कारपेट का चयन करे। यदि कारपेट बच्चों के कमरे के लिए चुनना है तो उसका रंग थोड़ा गहरा हो ताकि वह जल्दी गंदा न हो।
-चैड़ी बॉर्डर वाले कारपेट का चयन करें क्योंकि वो कमरे में बिछाने के बाद खूबसूरत लगते हैं।
-कारपेट खरीदते समय उसमें मौजूद फाइबर की मात्रा पर अवश्य ध्यान दें।
-मेहरून, नेवी ब्लू, स्कीन आदि रंगों के कारपेट फर्श पर बिछाने के बाद सुंदर लगते हैं।
-कारपेट का टिकाऊपन जाँचने के लिए उसे गोल फोल्ड करके खोलें। यदि उसमें सिलवटे पड़ती हैं तो वह कारपेट अच्छा नहीं है।
- कारपेट ऐसी चीज है, जिसका उपयोग लंबे समय तक होता है। अत कारपेट के दाम से अधिक उसके टिकाऊपन पर ध्यान दें।
-कीमत व टिकाउपन के बारे में फैसला लेने से पहले दूसरे दुकानों में भी कीमत का जायजा लें। चूंकि कारपेट के मटेरियल में आसानी से अन्तर कर पाना मुश्किल होता है इसलिए आर्टिफिशियल और असल चीजों की पहचान के बारे में जानकारी पहले ही इकट्ठा कर लें।
-कारपेट के धागे के ऐंठन पर गौर करें। ये जितना ज्यादा कसा हुआ होगा रोएं निकलने की संभावना उतनी ही कम होगी। एक धागे में जितनी ज्यादा ऐंठन होगी रोंआ उतना घना होगा और ऐसे में पैर के निशान कम दिखेंगे।

कारपेटस की साफ सफाई
-कालीन को ज्यादा समय तक चलाने के लिए छह महीने में एक बार ड्ाईक्लीन जरूर कराएं।
-अगर आप ड्ाईक्लीनर के यहां कारपेट नहीं देना चाहती तो उन्हें घर पर बुलवाकर कालीन साफ करवा सकती है।
-अगर कालीन बड़ा है तो ड्ाईक्लिनिंग ही एकमात्र उपाय है। यदि घर में धोया जा सकता है तो वाशिंग मशीन में या किसी की मदद से साॅफट डिटर्जेंट से इसे धो सकती है।
-कारपेट को झाडू से साफ नहीं करें। इससे रोएं खराब हो जाते है। कारपेट ब्रश से ही साफ करें।
-महीने में एक बार कालीन बाहर निकाल कर झड़वा लें और धूप जरूर लगाएं।
-कालीन को लंबे समय तक चलाने एंव धूल मिटटी से बचाने के लिए कालीन पर ट्रांसपेरेंट
प्लास्टिक शीट बिछा सकती है।
-कारपेट पर खाने पीने की चीजे न गिरे। यदि कोई गीली चीज गिरती है तो उस हिस्से को सूखे कपड़े से धोकर और रीठा के पानी से साफ कर फौरन धूप मे रखें। इससे कालीन में कीड़ा नहीं लगेगा।

Friday, January 12, 2018

स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है- विटामिन ई (एवियन कैप्सूल)

सेहतमंद शरीर के लिए विटामिन्स की जरूरत होती है. विटामिन ई भी एक काफी सहरें अद्वितीय गुणों से भरपूर है. विटामिन E जहाँ एक और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में हमारी शरीर की कोशिकाओं की रक्षा करता है, वहीं दूसरी और यह ऊर्जा का बहुत अच्छा स्त्रोत है। विटामिन ई हमारे शरीर की रोग प्रति रोधक क्षमता को बनाए रखने और हमें अनेकों रोगों से बचाने में मददगार है।इसकी कमी से शरीर में कई और दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं. गर्भवती महिलाओं की खुराक में विटामिन ई की कमी से बच्चों में मानसिक कौशल संबंधी विकार व उपापचय में समस्या की संभावनाएं पैदा हो सकती हैं. विटामिन ई झुर्रियों को रोकने में विटामिन ई लाभकारी है. विटामिन ई यौगिकों के एक समूह का प्रतिनिधि है जिसमें टोकोट्रॉयनॉल और टोकोफेरॉल दोनों निहित हैं। यह खून में लाल रक्त कोशिका (Red Blood Cell) को बनाने के काम आता है। शरीर के अनेक अंगों को सामान्य रूप में बनाये रखने में मदद करता है जैसे कि मांसपेशियां व कोशिकाएँ। यह शरीर को ऑक्सीजन के नुकसानदायक रूप से बचाता है, जिसे ऑक्सीजन रेडिकल्स (oxygen radicals) कहते हैं। इस गुण को एंटीओक्सिडेंट (anti-oxidants) भी कहते है।


विटामिन ई की कमी कैसे होती है
कई लोग एक लंबे समय तक कम वसा वाला खाना खाते हैं, जिस कारण उन्‍हें विटामिन ई की कमी हो जाती है। इस तरह की डाइट से अन्‍य विटामिन की कमी भी हो सकती है। इसके अलावा अगर आपको एक तरह के खाने से विटामिन ई की कमी नहीं है, तो इसके पीछे कई तरह की बीमारियां जैसे क्रोह्न (Crohn) या गैलब्‍लेडर डिसऑर्डर (gallbladder disorders) भी हो सकती हैं।

विटामिन ई कमी के लक्षण

1) मांसपेशियों में कमजोरी
इसकी कमी के सबसे बड़े लक्षणों में मायोपैथी और मांसपेशियों में कमजोरी है। विशेषज्ञों के अनुसार मायोपैथी मसल्स फाइबर का परिणाम है, जो समय के साथ कमजोर हो जाते हैं। शरीर में विटामिन ई और सेलेनियम की कमी से मायोपैथी का मामला गंभीर हो सकता है और इससे लिपिड पेरॉक्सीडेशन भी हो सकता है।

2) नजर कमज़ोर हो जाती है
विटामिन ई की कमी से आंखों का रेटिना और उसका डिजेनरेशन पतला हो सकता है। डिजेनरेशन से आंखों की अंदर परत प्रभावित होती है। इसके अलावा विटामिन ई की कमी से आपको धुंधला दिखेगा और रात के समय ठीक से नहीं दिखेगा।

3) खून की कमी
खून में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी के चलते खून की कमी हो जाती है। रेड ब्लड सेल के जरिए हीमोग्लोबिन की मदद से शरीर में अन्य क्षेत्रों के लिए ऑक्सीजन परिवहन में मदद मिलती है। हेमोलिटिक एनीमिया में लाल रक्त कोशिकाएं आसामान्य रूप से कम हो जाती हैं, जिससे विटामिन ई की कमी हो सकती है। विटामिन ई की कमी से जन्म के समय बच्चे का वजन कम हो सकता है। विटामिन ई की कमी को पूरा करने के लिए उन्हें टोकोफेरोल ट्रीटमेंट दिया जा सकता है।

4) तंत्रिका संबंधी परेशानी
विटामिन ई की कमी से सेंट्रल नर्वस सिस्टम की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। इसकी कमी से आपके हाथ और पैर का विकार बिगड़ सकता है, आप बीमार महसूस करेंगे और आप संतुलन खो सकते हैं। विटामिन ई में एंटीऑक्सीडेंट गुण हैं, जो ऑक्सिडेटिव तनाव के कारण शरीर को प्रभावित होने से रोकते हैं।



विटामिन ई से होने वाले लाभ
 विटामिन ई त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद माना गया है, यह त्वचा से मृत कोशिकाओ और काले धब्बो को निकालने का काम करता है| इसके साथ ही यह स्किन को मुलायम और गोरा भी बनाता है। 
मानसिक तनाव से राहत
शरीर में विटामिन ई की पर्याप्‍त मात्रा होने पर व्यक्ति को मानसिक समस्‍याएं कम होती है, और तनाव से भी राहत मिलती है| दरहसल कुछ शोधो में यह बात सामने आई है की विटामिन ई की कमी से मानसिक समस्‍याएं भी हो सकती है। 

 कैंसर से बचाव
विटामिन ई कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियो से लड़ने में भी मददगार होता है| कैंसर से बचाव के लिए वीट, ग्रेन्स, नट्स और बीन्स का सेवन लाभदायक माना गया है| इन आहारो में मौजूद विटामिन ई आपको ह्रदय रोग और कैंसर जैसी बीमारी से बचाने मे मदद करते है| 

लाल रक्त का निर्माण
विटामिन ई रेड ब्लड सेल्स यानि लाल रक्त की कोशिकाओ का निर्माण करती है, यदि गर्भवती महिलाये विटामिन ई का सेवन ना करे, तो इससे उनके बच्चे को एनीमिया होने का खतरा रहता है| 

-विटामिन ई से होने वाले अन्य लाभ
विटामिन ई एलर्जी को रोकने में मदद करता है।
इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।
विटामिन ई शारारिक क्षमता को बढ़ता है।
विटामिन ई त्वचा की परेशानिया के लिए भी लाभकारी होता है।
विटामिन ई हाई ब्लड प्रेशर को बढ़ने से भी रोकता है।

विटामिन ई  कैप्सूल (एवियन कैप्सूल)
शुद्ध विटामिन ई  कैप्सूल बहुत काम का होता है। विटामिन ई कैप्सूल हीलिंग में मदद करता है और साथ ही त्वचा, नाखूनों और सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। विटामिन ई एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो उम्र के बढ़ने के असर को कम करता है। इसे रोजमर्रा के आहार में जरूर शामिल करना चाहिये। विटामिन ई  कैप्सूल आसानी से बाजार में मिल जाता है। आप इसे तरल अथवा कैप्सूल के रूप में उपयोग कर सकते हैं। 

-दाग-धब्बों को करे दूर विटामिन ई का एक कैप्सूल लें और सूई की मदद से इसमें एक छेद कर लें। अब इसके अंदर का सारा ऑयल निकाल लें और अपने प्रॉब्लम एरिया पर लगाएं। ये एक सीरम की तरह काम करेगा और चेहरे के डार्क स्पॉट्स और दाग-धब्बे को कम करेगा. बेहतर रिजल्ट के लिए इसे रातभर ऐसे ही लगाकर छोड़ दें। -. विटामिन-ई रुखी त्वचा ठीक करें त्वचा को प्राकृतिक नमी प्रदान करने के लिए विटामिन-ई बेहद फायदेमंद है। इसके अलावा यह त्वचा में कोशिकाओं के नवनिर्माण में भी सहायक है। इसके लिए 1/4 कप शिया बटर में 2 चम्मच विटामिन ई तेल,
- 2 चम्मच एलोवेरा जेल और गुलाब के तेल की 12 बूंदें मिलाएं। अब इस लोशन को दिन में दो बार लगाएं।
-विटामिन ई से ठीक करें स्ट्रेच मार्क्स स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पाने के लिए 12 विटामिन ई कैप्सूल्स का ऑयल और 1/2 कप कोकोआ बटर और 15 लोबान के तेल को मिलाकर मिक्सचर तैयार करें। इस मिक्सचर को अपने प्रॉब्लम एरिया पर लगाएं और बस स्ट्रेच मार्क्स को दूर हो जाएंगे। 5
. सोरायसिस और एक्जिमा के लिए विटामिन ई कैप्सूल सोरायसिस और एक्जिमा जैसी गंभीर त्वचा की समस्याओं का भी विटामिन ई के उपयोग से ठीक किया जा सकता है। बस आपको उस जगह पर विटामिन ई तेल का तेल लगाने की जरुरत है।
-झुर्रियों से दिलाए छुटकारा जैसा कि आखों के पास की स्किन काफी पतली और डेलिकेट होती इसलिए वहां एजिंग की निशानियां सबसे पहले देखने को मिलती है, इसलिए हर आइ-क्रीम में विटामिन ई मौजूद होती है। ये झुर्रियों से छुटकारा दिलाने में असरदार होती है। आप चाहे तो विटामिन ई का सीधे तौर पर भी इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए कटोरी में एक विटामिन ई कैप्सूल के अंदर का ऑयल निकाल लें और इसमें जैतून के तेल के 5-6 बूंदे मिलाकर मिक्सचर तैयार करें। सोने से पहले इसे अपनी आंखों के आस-पास की स्किन पर लगाएं। बस हो गया आपका काम। 
. विटामिन ई ठीक करें हाइपर पिग्मेंटेशन विटामिन ई से हाइपर पिग्मेंटेशन ठीक किया जाए सकता है। इसके लिए एक चम्मच कास्टर आयल में 1-2 कैप्सूल विटामिन ई ऑयल मिलाएं। अब इसे चहरे पर अच्छे से मालिश करें और रात भर के लिए छोड़ दें। इसे एक महीने तक लगाएं। 8
. खुश्क हाथों के लिए विटामिन ई विटामिन ई आपकी त्वचा की सतह से अशुद्धियों को दूर करने में और इसके तेल संतुलन को बनाए रखने में सक्षम है। इसके लिए 2-3 विटामिन ई कैप्सूल का तेल निकाल लें और उसमें एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाएं। अब इस मिश्रण में पानी मिला कर अपने हाथों को 5 मिनट के लिए इस मिश्रण में रखें। फिर अपने हाथों को निकाल कर अच्छे से पोछ लें। 

 फटे होठों को कहें अलविदा ड्राय और फटे होंठों के लिए अब आपको लिप बाम के भरोसे रहने की ज़रूरत नहीं है। बस एक विटामिन ई कैप्सूल लें और इसे काटकर इसके अंदर मौजूद ऑयल अपने होंठों पर लगाएं और पाएं सॉफ्ट लिप्स।



शरीर में विटामिन E की कमी को पूरा करने वाले खाद्य पदार्थ-

हरी पत्तेदार सब्जियां- हरी पत्ते दार सब्जियां जैसे पालक, विटामिन E के साथ-साथ आयरन का अभी अच्छा स्त्रोत है। इसके अलावा, शलगम, सरसों की पत्तियां और शकरकंद में भी भरपूर मात्रा में विटामिन ई पाया जाता है। 100 ग्राम पालक में लगभग 2.1 मिलीग्राम विटामिन ई होता है।

सूखे मेवे- खास तौर पर बादाम, में सबसे ज्यादा विटामिन ई होता है। 100 ग्राम बादाम में 26.2 मिलीग्राम विटामिन ई होता है। इनके अलावा, अखरोट, मुनक्के, किशमिश यह सभी विटामिन ई और आयरन के सबसे बेहतर स्त्रोत हैं।

सूरजमुखी के बीज- सूरज मुखी के बीजों को भून कर इनका सेवन विटामिन E की कमी को बेहद तेजी से दूर कर सकता है। सूरजमुखी के 100 ग्राम बीजों में 36.3मिलीग्राम तक विटामिन होता है।

एवोकैडो- विटामिन E की कमी वाले लोगों के लिए एवोकैडो का सेवन भी फायदेमंद है। 100 ग्राम एवोकैडो में, 2.1 मिलीग्राम विटामिन ई पाया जाता है।

मछली (रेनबो ट्राउट)- मछली विटामिन ई का बहुत अच्छा स्त्रोत है खास तौर पर, रेनबो ट्राउट मछली। इस मछली में 100 ग्राम में 2.8 मिलीग्राम विटामिन ई मौजूद होता है। इनके अलावा, स्वोर्डफ़िश (10%), मछली (6%), स्मोक्ड सामन (6%), और सामन (5%) के सेवन से भी विटामिन ई की कमी को दूर किया जा सकता है।


ब्रोकोली- ब्रोकोली हरी सब्ज़ियों में पाए जाने वाले सभी तत्वों से भरपूर होने के साथ-साथ, विटामिन E का भी अच्छा स्त्रोत होती है। 100 ग्राम ब्रोकोली में, 1.5 मिलीग्राम विटामिन ई होता है।


पीनट बटर- विटामिन ई की कमी वाले लोगों को बटर का सेवन जरूर करना चाहिए। वहीं स्वास्थ्य के मामले में पीनट बतर और भी बेहतर होता है।

बच्चों में इन 10 तरीकों से डालें काम की आदतें: Good Habits

  POST पेरेंटिंग लाइफस्टाइल good habbits by   Nidhi Goel April 1 Click to share on Twitter (Opens in new window) Click to share on Facebook ...

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