Wednesday, October 11, 2017

एक्सरसाइज फाॅर बैली फैट


सुंदर इकहरा बदन महिलाओं की सुंदरता का राज होता है। लेकिन कई महिलाओं के लिए तो ये एक सपने की तरह हो गया है।  क्योंकि आजकल युवतियां हो या षादीषुदा महिलाएं सभी में बैली फैट की समस्या देखी जाती है क्योंकि अधिकतर सभी का कार्य चलने फिरने की बजाए बैठने का ज्यादा हो गया है। जिसका सबसे ज्यादा असर लोअर पार्ट में ही देखा जाता है। लेकिन समस्या यहां ये है कि महिलाएं हो या युवतियां सभी चाहती है कि वे किसी तरह इस समस्या से छुटकारा पा सके इसके लिए तरह तरह के नुस्खे अजमाती दिखती है लेकिन उनको नकारात्मकता ही हासिल होती है। क्योंकि वे अपने वर्कआउट पर खासा ध्यान नहीं देती है यहां हम आपको कुछ ऐसे व्यायाम बताएंगे जिनके जरिए आप अपने बैली फैट को कम कर सकेंगी।
जोगिंग और वाॅक
यदि आप अपना लोअर पार्ट कम करना चाहते है तो जोगिंग और वाॅक करे ये एक कारगर एक्सरसाइज है जिससे हमें थोड़े समय में ही फर्क नजर आने लगता है। रोज 25 से 30 मिनट के लिए वॉक व जोगिंग करें। लगातार गति को तेज न रख सकें तो बीच में थोड़ा ब्रेक लें और फिर बाकी समय को पूरा करें। थोड़ी देर तेजी से चलें और फिर स्पीड कम कर लें। जितना तेजी से वॉक कर सकते हैं, करें। ट्रेडमील पर भी आप ऐसा ही कर सकते हैं।
साइक्लिंग
यदि आपको भी साइक्लिंग करना अच्छा लगता है तो आप साइक्लिंग से अपने लोअर पार्ट की चर्बी कम कर सकते है। क्योंकि इसका सबसे ज्यादा इफेक्ट हमारे लोअर पार्ट पर पड़ता है। रोजाना कम से कम आधे घंटे तक साइकिल चलाने से आप अपना वजन आराम से कम कर सकते हैं।
रस्सी कूदना
अगर आप अपनी कमर को पतला करना चाहती है तो यह व्यायाम आपके लिए काफी जरूरी है। यह कमर को पतला करने के साथ ही पेट की मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है। शुरू में इसको केवल एक मिनट तक करें और बाद में 15 सेकेंड का तक आराम करके पांच बार दोहराएं।
क्रंच
क्रंच एक्सरसाइज का सीधा असर आपके जंाघो और पेट पर पड़ता है।हम क्रंच भी कई विधियो से कर सकते हैं। आप लोवर एब्स और साइड फ्लैब के लिये अलग अलग वेरियेशन कर सकते हैं। एब्डॉमिनल क्रंचेस पीठ के बल लेट जाएं। घुटनों को मोड लें। अपने हाथों को मोडकर सिर के नीचे रख लें। अपने कंधों को जमीन से थोडा ऊपर की तरफ उठाएं। सामान्य स्थिति में आएं। यह एक्सरसाइज कम से कम 12 बार करें। बाइसाइकिल क्रंचेज इसमें पैरों को स्थिर रखने की बजाए उसे साइकिल की तरह चलाना होता है। यह पेट, जांघों, कमर के आसपास की चर्बी को कम करता है।
वाल स्लाइड्स एक्सरसाइज

यह एक्सरसाइज बहुत ही साधारण है जिसे आप अपने घर पर भी कर सकते है इसके लिए आप अपने घर की किसी भी दीवार से सटकर सीधा खड़ा हो जाइये और हाथो को भी सीधा रखिये ।फिर अपने घुटनो को इस तरह से मोड़िये जैसे आप किसी कुर्सी पर बैठने का प्रयास कर रहे है और बैठे है।इस अवस्था मे अपने आप को 30 से 60 सेकंड तक मोडे रहिये और अपनी पीठ को दीवारों से सटा ही रहने दे और हाथो को सीधा रखे। यह व्यायाम न केवल आपके कमर की चर्बी को दूर करता है बल्कि यह पैर और जाँघों की मांसपेशियों को भी मजबूत बनता है।

बर्पी करें
इस व्यायाम को हाई इंटेसिटी इंटरवल ट्रेनिंग भी कहा जाता है। इसको करने के लिए स्क्वैट की मुद्रा की तरह दोनों हाथों को जमीन पर रखकर शुरू करें। फिर  एक पैर को ऊपर उठाकर पुश-अप की मुद्रा में आए। इससे आपकी कमर को परफेक्ट शेप मिलेंगी साथ ही फैट कम होगा। 
कैटल बॉल स्विंग
केटल बॉल एक्सरसाइज करने के लिए झुक कर खड़े हो जाये। इसके बाद दोनों पैरों में थोड़ा गैप बनाए और कैटल बॉल्स को दोनों हाथों में पकड़कर पैरों के बीच में होते हुए कंधों तक उठाकर स्विंग करें। इस व्यायाम को नियमित रूप से करने पर आप अपने पेट की चर्बी को आसानी से कम कर सकते हैं.
प्लैंक
प्लैंक व्यायाम से भी कमर के आसपास की चर्बी कम होती है। साथ ही यह हाथों और सीने को भी मजबूत बनाने वाला व्यायाम है।
बोट स्टाइल
बोट यानी नाव के आकार में शरीर को स्ट्रेच करने का यह व्यायाम पेट को कम करने में बहुत ही फायदेमंद है। इसे करने के लिए जमीन पर बैठ जाएं और अपने दोनों हाथो को सीधा रखें।अब दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए सांस खींचें और झुकते हुए दोनों पंजों को हाथों से छुएं. इस दौरान कोशिश करें कि आपके कंधों से घुटने ना छुए। इस व्यायाम को रोजाना तीन बार करें. कुछ ही सप्ताह में आपके पेट की चर्बी कम होने लगेगी।
टीजर
जमीन पर पीठ के बल लेंटे और अपने दोनों हाथों को कान की सीधाई में ऊपर उठाएं। सांस अंदर लें। फिर सांस को बाहर छोड़ते हुए अपने दोनों पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं। ऐसा करने पर आपके शरीर की पोजिशन टी जैसी बन जाएगी। फिर धीरे से सांस लें और अपनी सामान्य पोजिशन पर आ जाएं। अपने अंगूठों तथा अंदर की जांघों को कस कर जकड़े रहें, जिससे पैर टोन बनें। ऐसा 10 बार करें।

टीनएजर बच्चों को बोलने से पहले ध्यान दें




पारुल अपने कमरे में लैपटॉप पर काम कर रही थी. जब मां ने देखना चाहा कि वो क्या कर रही है, तो वो लैपटॉप को छुपाने की कोशिश करने लगी. मां की नज़र लैपटॉप पर खुले फेसबुक पर गई, पारुल किसी से फेसबुक पर चैट कर रही थी. बस, फिर क्या था, मां ने चिल्लाना शुरू कर दिया, “कल तुम्हारा पेपर है, पिछली बार भी तुम्हारे नंबर कम आए थे और तुम हो कि…” पारुल ने मुंह बनाते हुए अपना काम चालू रखा जैसे कि उसने कुछ सुना ही ना हो. फिर मां यह कहते हुए बाहर चली गईं कि “तुमसे कुछ कहने का फ़ायदा तो है नहीं, तुम कुछ समझती तो हो नहीं. ज़रा अपने पड़ोस की निर्मला आंटी की लड़की से कुछ सीखो…” पारुल को यह सुनकर बहुत बुरा लगा. दरअसल, वो फेसबुक पर अपनी सहेली से अगले दिन के पेपर की तैयारी को लेकर ही बात कर रही थी और उसने मां को इसके बारे में इसलिए नहीं बताया, क्योंकि वे इस तरह से पढ़ाई करने को बकवास मानती थीं. ऐसा कई बार होता है कि हम बिना कुछ जाने-समझे कभी भी अपने बच्चों पर बिफ़र पड़ते हैं, जिसका टीनएज बच्चों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है.
आजकल के किशोरों से बात करने का मतलब काफ़ी मेहनत-मशक्कत करना है. टीनएज बच्चों पर हुए एक रिसर्च के अनुसार, हम दिनभर में टीनएज बच्चों से ऐसी कई बातें कहते हैं, जिनका सकारात्मक की बजाय नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. उनमें से मुख्य सात बातों पर यहां एक नज़र डालेंगे.
1. जब मैं तुम्हारी उम्र की थी…
जब मैं तुम्हारी उम्र की थी. इतनी आज्ञाकारी और संस्कारी थी कि अपने माता-पिता को कभी पलटकर जवाब नहीं देती थी. मुझे तुम्हारी उम्र में खाना बनाना, कपड़े धोना… सब कुछ आ गया था. परेशानी इस तरह की पुरानी कहानियों को बताने में नहीं है, बल्कि बच्चों को कहानियां सुनना अच्छा लगता है और इसका उन पर अच्छा प्रभाव भी पड़ता है. लेकिन बहुत-से बच्चे इस तरह की बातें सुनते ही यह मतलब निकालने लगते हैं कि उनके पैरेंट्स उनको सुनाने के लिए ऐसा कह रहे हैं. वे अभी भी अपने उसी पुराने ज़माने में जी रहे हैं और आगे नहीं बढ़ रहे हैं. या फिर जो कमियां उनके समय पर रहीं, अभी भी बार-बार उन्हीं का अफ़सोस ज़ाहिर करते रहते हैं. आज के कंप्यूटर युग में टीनएजर की सोच बहुत आगे बढ़ चुकी है. ये ना समझें कि वे आपको सुनते नहीं, बल्कि वे वो सब कुछ सुनते हैं, जो आप उनको सुना रहे हैं. हां, वे उन बातों पर अमल करें या नहीं, यह और बात है.
एक्सपर्ट की सलाहः इस तरह कहने की बजाय आप कह सकते हैं कि मैं भी तुम्हारी तरह इस दौर से गुज़र चुकी हूं. इस समय बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. क्या तुम मुझे बताओगी कि तुम्हारे मन में क्या चल रहा है?
2. ज़रा सीखो उससे कुछ…
पैरेंट्स ये वाक्य भी कई बार अपने बच्चों से कहते हैं कि फलां से सीखो यानी किसी दूसरे से तुलना या फिर उसका उदाहरण ज़रूर देते हैं. लेकिन आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि हर इंसान अपना अलग व्यक्तित्व लेकर पैदा होता है. आपकी तुलनात्मक बातें आपके टीनएज बच्चे में सुधार लाने की जगह उसके आत्मविश्‍वास को और भी कमज़ोर बना सकती हैं.
एक्सपर्ट की सलाहः तुलना करने की बजाय आप यह कह सकते हैं- “बेटा, हर इंसान अपने आपमें कंप्लीट नहीं होता, पर आप अपने व्यक्तित्व में और भी निखार ला सकते हो. अपनी अच्छाइयों को उभारकर व कमियों को दूर करके.” इस तरह आप उसे उसकी अच्छाइयों और कमियों दोनों के बारे में बता सकते हैं.
3. क्या तुम्हें लगता है कि बस तुम्हारे पास ही प्रॉब्लम्स हैं…?
आपकी बेटी आपके पास ग़ुस्से से आती है और कहती है, “मम्मी, आज किसी ने मेरी हेयर स्टाइल की तरफ़ ध्यान ही नहीं दिया.” यह कहती हुई बिना कुछ खाए-पीए अपने कमरे में जाकर रोने लगती है. आप अपने मन में सोचेंगी कि जीवन में इतनी परेशानियां हैं और यह इतनी-सी बात पर परेशान है. यदि आप अपने बीते कल को देखेंगी, तो पाएंगी कि कभी आप भी इसी तरह की छोटी-छोटी बातों पर बेवजह परेशान हो जाया करती थीं. जो प्रॉब्लम आपको बहुत छोटी लगती है, वही उनके लिए इतनी बड़ी होती है कि मानो उनकी दुनिया ही बरबाद हो गई हो. जैसे कामवाली बाई के न आने की ख़बर आपको हिला देती है, पर आपके पति को लगता है, बस, इतनी-सी बात?
एक्सपर्ट की सलाहः सबसे पहले अपने टीनएज बच्चे की पूरी बात बिना रोके-टोके सुनें. साथ ही वो किस मनोस्थिति और परेशानियों से गुज़र रहा है, उसे समझने की कोशिश करें. फिर उसी अनुसार उसे स्थिति और सच्चाई के बारे में धैर्य से समझाते हुए हर पहलू से अवगत कराएं.
4. मेरे पास तुम्हारी बकवास बातों के लिए व़क्त नहीं…
आप अपने काम में उलझी हुई हैं और आपका टीनएज बच्चा आपसे आकर अपने फ्रेंड की जन्मदिन की पार्टी का पूरा ब्योरा बताता है कि क्या-क्या किया, कैसे कपड़े पहने थे आदि. आप कहती हैं, “मेरे पास अभी तुम्हारी इस तरह की फ़िज़ूल बातों के लिए व़क्त नहीं है.” उसका सारा जोश वहीं ठंडा पड़ जाता है. यह सोचते हुए कि मम्मी के पास तो मेरे लिए समय ही नहीं है. वो चुपचाप जाकर कमरे में बैठ जाता है. इसी तरह धीरे-धीरे मानसिक रूप से वो आपसे दूर होता चला जाता है.
एक्सपर्ट की सलाहः कोशिश करें कि उसकी बातें सुने बिना कोई टिप्पणी न करें और यदि आप सच में कोई ज़रूरी काम कर रही हैं, जिसे टाला नहीं जा सकता, तो उसे अपनी स्थिति के बारे में बताएं और उससे बातचीत करने का एक समय निश्‍चित कर लें.
5. जैसा मैं कहती हूं, तुम्हें वैसा ही करना होगा, आख़िर मैं तुम्हारी मां हूं…
किशोरों के माता-पिता होने के नाते हम अक्सर ये सोचते हैं कि हमारे बच्चों को दुनिया की
कोई समझ नहीं है, न उनमें आगे बढ़ने की कोई उमंग है और न ही उनके जीवन का कोई मक़सद. लेकिन देश में हुए एक सर्वे में किशोरों से पूछे गए सवालों के जवाब से यह पाया गया कि ज़्यादातर किशोर अपने भविष्य को लेकर काफ़ी सचेत और सतर्क हैं. साथ ही वे ख़ुद के करियर से संबंधित भविष्य की संभावनाएं, पॉलिसी, स्कोप आदि के बारे में कंप्यूटर पर सर्च करते रहते हैं. लेकिन अभी भी उनका दिमाग़ इतना विकसित नहीं हुआ होता कि वे कोई बड़ा फैसला ले सकें.
एक्सपर्ट की सलाहः आप बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी भविष्य की प्लानिंग के बारे में उनसे सुनें और फिर उनसे उस विषय पर क़िताब और इंटरनेट द्वारा जानकारी हासिल करने को कहें. इससे उन्हें पता चलेगा कि वो उस विषय पर अपना करियर बना सकते हैं या नहीं, क्योंकि आपसे बेहतर वो अपने आपको जानते हैं कि वो क्या कर सकते हैं, क्या नहीं.
6. तुम पछताओगे एक दिन…
इस तरह की बात वही लोग कह सकते हैं, जिनके साथ इस तरह की घटना हुई हो यानी वे अपने बीते हुए कल की पुनरावृत्ति होते देख सकते हैं. आपकी इन गहरी बातों को आपका टीनएज बच्चा नहीं समझ पाएगा और आपके ऐसा कहने से उसे ग़ुस्सा ज़रूर आएगा.
एक्सपर्ट की सलाहः इस उम्र में किशोर केवल आज को देखते हैं. उन्हें बस पार्टीज़ में की गई मौज़-मस्ती समझ में आती है. उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं कि आज की गई पार्टी का असर आनेवाले सालों में क्या होगा. इसलिए बेहतर यही होगा कि आप उनसे आज के संदर्भ को लेकर ही बात करें. उनकी पूरी ज़िंदगी पर इसका क्या असर होगा, इस बात पर चर्चा न करें.
7. आज दिनभर स्कूल में कैसा रहा?
निखिल के घर में घुसते ही मां ने पूछा, “निखिल, स्कूल में आज क्या सीखा?” निखिल ने चिढ़ते हुए प्रश्‍न से ही जवाब दिया, “कैसा रहता है स्कूल में दिन? होता ही क्या है स्कूल में सीखने को?”
एक्सपर्ट की सलाहः बच्चे को थोड़ी देर रिलैक्स करने दें और फ्रेश होने और भोजन करने के बाद आप उससे सामान्य सवाल करने की बजाय विशिष्ट सवाल करें, जैसे- “बेटा आज साइंस का लेक्चर कैसा था? क्या तुमने कुछ नया सीखा?
और कुछ बातें, जो अपने टीनएज बच्चे के सामने न कहें-
♦ तुम्हें क्या मैं बेव़कूफ़ लगता/लगती हूं?
♦ पहले बड़ी हो जाओ.
♦ मैं थक चुकी हूं तुमसे.
♦ मैंने अपने माता-पिता को कभी उल्टा जवाब नहीं दिया.
♦ मुझे पता है कि तुम सुनोगे तो नहीं.


बच्चों में इन 10 तरीकों से डालें काम की आदतें: Good Habits

  POST पेरेंटिंग लाइफस्टाइल good habbits by   Nidhi Goel April 1 Click to share on Twitter (Opens in new window) Click to share on Facebook ...

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